मैनें उससे नहीं कहा
हैप्पी न्यू ईयर
सुबह उठकर, पहली किरण के साथ ;
शायद ये सोचकर
कि वो मुझे भूल चुका है
पिछले साल के किसी गुमनाम दिन की तरह .
कि, उसके मन के कोने में
होंगे कितने ही लोगों कि तस्वीरें
कितनी ही और बातें,
जो ज्यादा जरूरी हैं
मेरे बेमतलब चेहरे के.
मेरी यादों के पुरानेपन के सिवा;
कई काम होंगें जरूरी,
साल के पहले दिन, सुनहले दिन.
जब उसके यादों में
उभरा नहीं मैं कोई अहसास बनकर.
मैंनें फोन की घंटी नहीं बजाई
कहने को 'सुप्रभात'
'नया प्रभात उसके जीवन में
जगमगाये, खुशियाँ नई लहराये
ताजे मस्तियों के झुँड
उसे दुलराये,
जो प्यारे हैं उसे, और भी मनभाये
जिसे वो भूलता है
वो भी उसे, मन ही मन,
चुपके से उसके लिये आँसू बहाये'!
Sunday, January 9, 2011
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