सऊदी अरब इस्लामी कट्टरपन का सबसे मजबूत किला है. पाकिस्तान तो उस कट्टरपन का बौद्धिक संस्करण है. और पाकिस्तान का नाम लेने से हमें उन करोड़ों कट्टर मुसलमानों को भी याद रखना चाहिये, जो भारत भूमि में रहने की बावजूद सऊदी अरब को एक आदर्श इस्लामी राज्य मानते हैं. सऊदी अरब वहाबी-सलाफी इस्लामी विचारधारा को बढावा देता है. सऊदी की जमीन से ही ओसामा बिन लादेन निकलकर दुनिया में कायदा की स्थापना का सशस्त्र स्वप्न देखता था.
इस्लाम में अल्लाह, पैगम्बर, और आखिरत में विश्वास मुसलमानों की आस्था का आधार माना जाता है. यही कारण है, कि हर आस्थावान का अंतिम संस्कार विशेष महत्व रखता है. अमेरिका ने जब ओसामा बिन लादेन का शिकार किया, तो दुनिया भर के कट्टर मुसलमानों ने उसके अंतिम संस्कार को लेकर अपनी आस्थागत भावना व्यक्त की थी. कारण, कि उस आतंकी को इस्लामी अंतिम संस्कार का सम्मान प्राप्त नहीं हुआ था. अभी अभी सऊदी मूल के एक ख्याति-प्राप्त पत्रकार जमाल ख्शोग्जी के अद्भुत तरीके से हत्या, और उसके पार्थिव शरीर के साथ घोर अमानवीय संस्कार की खबर माध्यमों में छाया हुआ है. पूरी दुनिया, जो सभ्य होने के तमाम दावों से सुसज्जित है, सऊदी अरब के इस घोर कृत्य से स्तब्ध है. खशोग्जी को दुर्दांत अपराधी नहीं था. वह सऊदी अरब की राजनीतिक व्यवस्था का आलोचक था. अपने देश में लोकतांत्रिक अधिकारों का पैरोकार था. उस खशोग्जी की हत्या का, जैसा की गहन संदेह है, राज्य द्वारा शड्यंत्र, और दूसरे देश में स्थित अपने कंसलेट के भीतर बर्बरता से हत्या को अंजाम दिया गया, वह एक अलग मुद्दा है. हम दुनिया भर के कट्टर मुसलमानों की दृष्टि में खशोग्जी के पार्थिव शरीर के साथ किये गये व्यवहार से जुड़ी प्रतिक्रिया पर गौर करना चाहते है. कहीं से किसी इस्लामी विद्वान ने, संस्था ने, संगठन ने एक मुसलमान के पार्थिव शरीर के प्रति किये गये सऊदी व्यवहार पर कुछ नहीं कहा है. ओसमा बिन लादेन, या भारत में मारे गये आतंकियों के पाथिव शरीर के साथ किये जाने वाले व्यवहार पर धर्मयुद्ध छेड़ेने की धमकी देने वाले भारतीय कट्टरपंथियों की जुबान भी तालू में सटे प्रतीत होते हैं.
क्या, सऊदी अरब धार्मिक सांस्कृतिक तौर पर इतना बदल चुका है, कि अपने ही मजहब के मूलभूत अवधारणाओं, पुर्वग्रहों को गैर महत्वपूर्ण मानने लगा है ? अगर ऐसा है, तो दुनिया भर के गैर मुस्लिमों को खुश होना चाहिये ! किस मुँह से दुनिया भर के कट्टरपंथी सऊदी अरब की सांस्कृतिक माहौल को आदर्श इस्लामी होने की घोषणा करते हैं ? क्या भारत के इस्लामी कट्टरपंथियों को बदल रही दुनयावी वास्तविकता का आभास नहीं है?
नकारात्मक घटनाओं से हमें अधिक सशक्त सीख प्राप्त होते हैं, बशर्ते, हम नकारात्मकता में निहित बदलाव को महसूस कर सकें
Sunday, November 18, 2018
जमाल खशोग्जी का अंतिम संस्कार
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