होली
काशी
धूम मचे आज पशुपति खेलत फाग-2 स्थायी
मध्यलय
कि हो आज,
पशुपति खेलत फाग हो
आहो पशुपति खेलत फाग (जोर से)
काशी धूम --------
पशुपति खेलत फाग हो
आहो पशुपति खेलत फाग (जोर से)
काशी धूम --------
हा-आ-आ
शंकर के कर डमरू बिराजै, भुत-बैताल लिये झाला अंतरा-1 मध्यलय
आहो, शंकर के कर डमरू बिराजै, भुत-बैताल लिये झाला
आहो, नाच कूद के होरी गावे,
आहो, नाच कूद के होरी गावे,
नाच कूद के, हा-आ-आ
आहो होरी गावे, पहिरे-ए-ए
लाला,
पहिरे गले मुंड माल
काशी धूम----
काशी धूम----
कि आहो
पशुपति खेलत फाग, हो आज पशुपति खेलत फाग (जोर से)
काशी धूम----2
साँची मगही गुलाबी बीड़ा, कंचन थाल मशाला अंतरा-2 मध्यलय
आहो साँची मगही गुलाबी बीड़ा, कंचन थाल मशाला
आहो, इतसे शंकर भांग धतूरा,
आहो, इतसे शंकर भांग धतूरा,
इतसे
शंकर हा-आ-आ
भांग धतूरा,
लाला चन्द्र विराजत भाल
काशी धूम ------
कि आहो पशुपति खेलत फाग, हो आज पशुपति खेलत फाग (जोर से)
काशी धूम ------
काशी धूम ------
आहो हीरा जड़ित कनक पिचकारी, नौ मन उड़त गुलाला अंतरा-3 द्रुत
आहो भर
पिचकारी गौरा जी पे मारी
भर पिचकारी
हा—आ—आ-आ-2
हा—आ—आ-आ-होरी हो—ओ
हो गौरा
जी पे मारे,
गौरा-आ-आ
लाला
गौरा हो गयी लाल
काशी धूम ------
कि आहो पशुपति खेलत फाग, हो आज पशुपति खेलत फाग (जोर से)
काशी धूम मचै--------
काशी धूम मचै--------
भैरो के सिर पाग रंगाये, कुसुम रंगाये बैताला अंतरा-4 द्रुत
आहो
भैरो के सिर पाग रंगाये कुसुम रंगाये बैताला
आहो नन्द कुँवर सिर सोहे गौरा के,
आहो नन्द कुँवर सिर सोहे गौरा के,
नन्द
कुवँर सिर हा-आ-आ-आ
सोहे
गौरा के, लाला शंकर के
मृग छाल
काशी धूम मचै--------
कि आहो पशुपति खेलत फाग, हो आज पशुपति खेलत फाग (जोर से)
काशी धूम----
रचयिता- स्वर्गीय नन्दकुमार त्रिपाठी
