Friday, March 6, 2015

होली गायन



होली

काशी धूम मचे आज पशुपति खेलत फाग-2            स्थायी मध्यलय
कि हो आज,
पशुपति खेलत फाग हो
आहो पशुपति खेलत फाग  (जोर से)
काशी धूम --------
हा-आ-आ

शंकर के कर डमरू बिराजै, भुत-बैताल लिये झाला       अंतरा-1 मध्यलय  
आहो, शंकर के कर डमरू बिराजै, भुत-बैताल लिये झाला
आहो, नाच कूद के होरी गावे,
नाच कूद के, हा-आ-आ
आहो होरी गावे, पहिरे-ए-ए
लाला, पहिरे गले मुंड माल
काशी धूम----
कि आहो पशुपति खेलत फाग, हो आज पशुपति खेलत फाग (जोर से)
काशी धूम----2

साँची मगही गुलाबी बीड़ा, कंचन थाल मशाला            अंतरा-2 मध्यलय
आहो साँची मगही गुलाबी बीड़ा, कंचन थाल मशाला
आहो, इतसे शंकर भांग धतूरा,
इतसे शंकर हा-आ-आ
भांग धतूरा,
लाला  चन्द्र विराजत भाल
काशी धूम ------
कि आहो पशुपति खेलत फाग, हो आज पशुपति खेलत फाग  (जोर से)
काशी धूम ------
 
आहो हीरा जड़ित कनक पिचकारी, नौ मन उड़त गुलाला       अंतरा-3 द्रुत
आहो भर पिचकारी गौरा जी पे मारी
भर पिचकारी 
हा—आ—आ-आ-2
हाआ-आ-होरी हो—ओ
हो गौरा जी पे मारे,
गौरा-आ-आ
लाला गौरा हो गयी लाल
काशी धूम ------
कि आहो पशुपति खेलत फाग, हो आज पशुपति खेलत फाग  (जोर से)
काशी धूम मचै--------

भैरो के सिर पाग रंगाये, कुसुम रंगाये बैताला               अंतरा-4 द्रुत
आहो भैरो के सिर पाग रंगाये कुसुम रंगाये बैताला   
आहो नन्द कुँवर सिर सोहे गौरा के,
नन्द कुवँर सिर हा-आ-आ-आ
सोहे गौरा के, लाला शंकर के मृग छाल
काशी धूम मचै--------
कि आहो पशुपति खेलत फाग, हो आज पशुपति खेलत फाग (जोर से)
 
काशी धूम----


रचयिता- स्वर्गीय नन्दकुमार त्रिपाठी