होली गीत
१. शंकर जी
काशी धूम मचे आज पशुपति खेलत फागकाशी---------
पशुपति खेलत फाग हो
आहो पशुपति खेलत फाग
काशी धूम --------
शंकर के कर डमरू बिराजै,
भुत-बैताल लिये झाला
नाच कूद के होली गावे-2,
नाच कूद के होली गावे-2,
पहिरे गले मुंड माल
काशी धूम----
साँची मगही गुलाबी बीड़ा,
काशी धूम----
साँची मगही गुलाबी बीड़ा,
कंचन थाल मशाला
इतसे शंकर भांग धतूरा-2,
इतसे शंकर भांग धतूरा-2,
चन्द्र विराजत भाल
काशी धूम ------
हीरा जड़ित कनक पिचकारी,
काशी धूम ------
हीरा जड़ित कनक पिचकारी,
नौ मन उड़त गुलाला
भर पिचकारी गौरा जी पर मारे-2,
भर पिचकारी गौरा जी पर मारे-2,
गौरा हो गयी लाल
काशी धूम मचै--------
भैरो के सिर पाग रंगाये,
काशी धूम मचै--------
भैरो के सिर पाग रंगाये,
कुसुम रंगाये बैताला
नन्द कुँवर सिर सोहे गौरा के-2,
नन्द कुँवर सिर सोहे गौरा के-2,
शंकर के मृग छाल
काशी धूम----
रचयिता- स्वर्गीय नन्दकुमार त्रिपाठी
काशी धूम----
रचयिता- स्वर्गीय नन्दकुमार त्रिपाठी
--------------
२. फगुआ फाग खेलन को
फगुआ फाग खेलन को जनकपुर
फगुआ फाग खेलन को जनकपुर
आयहुं राज दुलार
फगुआ फा----
आयहुं राज दुलार हो
आहो आयहुं राज दुलार
फगुआ फाग खे---
कोयल कुहुके पपिहा पिहके
देख बसंत बहारा
गृह-गृह युवति होली खेले
कंचन कलश हजार
फगुआ फाग खे-----
धौंसा धमके तबला ठनके,
फगुआ फा----
आयहुं राज दुलार हो
आहो आयहुं राज दुलार
फगुआ फाग खे---
कोयल कुहुके पपिहा पिहके
देख बसंत बहारा
गृह-गृह युवति होली खेले
कंचन कलश हजार
फगुआ फाग खे-----
धौंसा धमके तबला ठनके,
राजा जनक जी के द्वार
रंगमहल मिथिलेश किशोरी-2
रंगमहल मिथिलेश किशोरी-2
सखियाँ संग हजार
फगुआ फाग खेलन को जनकपुर
आयहुं राजदुलार
जनक दुलारी अबिर लिये झोरी,
फगुआ फाग खेलन को जनकपुर
आयहुं राजदुलार
जनक दुलारी अबिर लिये झोरी,
केसर राजदुलार
मचेउ धराधर रंगमहल में-2,
मचेउ धराधर रंगमहल में-2,
शोभा अगम अपार
फगुआ फाग-----
रामजी रंग सिया पर चिड़के,
फगुआ फाग-----
रामजी रंग सिया पर चिड़के,
सखियाँ देत ललकारा
नन्द कुमार अबिर अभरख से-2,
नन्द कुमार अबिर अभरख से-2,
भर गये शहर बजार
फगुआ फाग-----
रचयिता- स्वर्गीय नन्दकुमार त्रिपाठी
फगुआ फाग-----
रचयिता- स्वर्गीय नन्दकुमार त्रिपाठी
---------------
३. राजा दशरथ के दरबार
होरी रंग से भरी राजा दसरथ के दरबार
होरी रंग-----
दसरथ के दरबार हो
आहो दसरथ के दरबार
होरी रंग----
सरयू तीर अयोध्या नगरी,
कंचन जड़त केवारा
मणि माणिक के खम्भ जड़त हैंं-2,
मणि माणिक के खम्भ जड़त हैंं-2,
कुण्डी जरत हजार
होरी रंग से-----
बेला चमेली चहु दिशी गमके,
होरी रंग से-----
बेला चमेली चहु दिशी गमके,
केवरा इतर गुलाबा
रतन सिन्हासन राजित राजा दशरथ-2,
रतन सिन्हासन राजित राजा दशरथ-2,
केसर के फुहुकार
होरी------
विश्वामित्र वसिष्ठ जी के चेले,
होरी------
विश्वामित्र वसिष्ठ जी के चेले,
दसरथ जनक दुलार
रनिवासन से चले पिचकारी-2, मानौ गंगाजी के धार
होरी रंग-----
लाल गुलाल लाल भये बादर,
रनिवासन से चले पिचकारी-2, मानौ गंगाजी के धार
होरी रंग-----
लाल गुलाल लाल भये बादर,
लाल भये गुरुद्वारा
नन्द कुमार लाल भये राजा-2,
नन्द कुमार लाल भये राजा-2,
लाल भये सुत चार
होरी रंग से ------
होरी रंग से ------
-------------
४. आज सखी सैयाँ आवत होइहें
आज सखी सैयाँ आवत होइहैं,
बाँये नयन फड़के
आज सखी----
बायें नयन फड़के कि हो
आहो बाँये नयन फड़के
आज सखी सैयाँ-----
उड़ि-उड़ि कागा पलंग चढी बइठे,
आज सखी----
बायें नयन फड़के कि हो
आहो बाँये नयन फड़के
आज सखी सैयाँ-----
उड़ि-उड़ि कागा पलंग चढी बइठे,
बोलिया बोलत सगुन के2
चहूँ ओर झाल झमाझम बाजै,
चहूँ ओर झाल झमाझम बाजै,
चोलिया के बन्द सरकै
आज सखी----
आहो बाँये नयन फड़के---2
आज सखी सै----
अचरा फड़कै पुपुनी फड़कै,
आज सखी----
आहो बाँये नयन फड़के---2
आज सखी सै----
अचरा फड़कै पुपुनी फड़कै,
रही रही जियरा धड़कै2
चढल जवानी उमरिया कि थोड़ी,
चढल जवानी उमरिया कि थोड़ी,
पतरी कमर लचकै
आज सखी---
आहो बाक़ँये नयन----2
आज सखी----
सूतल रहलि सपन एक देखनी,
आज सखी---
आहो बाक़ँये नयन----2
आज सखी----
सूतल रहलि सपन एक देखनी,
पिया संग सोवै लिपट के
औचक आये जगाये दियो हैं,
औचक आये जगाये दियो हैं,
सास ननद धर के
आज सखी----
अबिर गुलाल कुंकुमा केसर,
आज सखी----
अबिर गुलाल कुंकुमा केसर,
घर घर अभरख झलकै
नन्द कुवँर पिय आये गयो हैं,
नन्द कुवँर पिय आये गयो हैं,
तिरछी मुकुट धरकै
आज सखी----
आज सखी----
---------------
५. दिल दे के पड़ा पछताना
दिल दे के बड़ा पछताना2
जब से प्रीत लगाइ है तुम से,
दिल दे के बड़ा पछताना2
जब से प्रीत लगाइ है तुम से,
तबसे दिल है दिवाना
देखन को अँखिया तरसत है,
देखन को अँखिया तरसत है,
बैन सुनन को काना
दिल दे के-----
जो बिछुरन तुमको हमसे था,
दिल दे के-----
जो बिछुरन तुमको हमसे था,
उचित न नेह लगाना
नेह लगा के सुधि बिसरा के,
नेह लगा के सुधि बिसरा के,
ऐसो कठिन प्रण ठाना
जुदाइ में होलि बिताना
दिल दे के बड़ा पछताना-2
ऐसो कठोर भये हिय तेरो,
जुदाइ में होलि बिताना
दिल दे के बड़ा पछताना-2
ऐसो कठोर भये हिय तेरो,
नेक लिखत नहीं आना
पाति लिखत मेरो छाती फाटे,
पाति लिखत मेरो छाती फाटे,
तन मन का न ठिकाना
बचन मुख से नहीं आना
दिल दे के-----
शंकर का इतना ही अरज है,
बचन मुख से नहीं आना
दिल दे के-----
शंकर का इतना ही अरज है,
हिल मिल फाग बिताना
नाथ कृपा कर दरसन देना,
नाथ कृपा कर दरसन देना,
अवगुन को बिसराना
दया हम पर दिखलाना
दिल दे के----------------------
रचयिता--- शंकर त्रिपाठी, इशमेला, बिहार
---------------
दया हम पर दिखलाना
दिल दे के----------------------
रचयिता--- शंकर त्रिपाठी, इशमेला, बिहार
---------------
६. परदेसी पिया नहीं आये
परदेसी पिया नहीं आये2
पीउ पीउ कहि के पपिहा पापी,
पिया कि याद दिलाये
कुहु कुहु कहिके कोयल पापिन,
कुहु कुहु कहिके कोयल पापिन,
ऊंची चढी के गाये
परदेसी पिया नहीं आये2
शिशिर हेमंत माघ बीत गयऊ,
परदेसी पिया नहीं आये2
शिशिर हेमंत माघ बीत गयऊ,
पुनि फागुन नियराये
सपनेहुँ पिया सुधियो न लीनी,
सपनेहुँ पिया सुधियो न लीनी,
सौतन कौन लुभाये
परदेसी पिया नहीं आये2
चम्पक बेला चमेली कमल दल,
परदेसी पिया नहीं आये2
चम्पक बेला चमेली कमल दल,
वन उपवन खिल आये
यौवन कलि खिल खिल भरी आये,
यौवन कलि खिल खिल भरी आये,
'शंकर' देवर चोर नित नैन लगाये
परदेसी पिया नहीं आये-2
सुन सखी चन्द्र, चान्दनी रतियाँ,
परदेसी पिया नहीं आये-2
सुन सखी चन्द्र, चान्दनी रतियाँ,
अतिसय दुख उपजावे
सेजिया निन्दिया दोनो बैरनियाँ,
सेजिया निन्दिया दोनो बैरनियाँ,
बिरह कि आग लगावे
परदेसी--------
रचयिता- शंकर त्रिपाठी
परदेसी--------
रचयिता- शंकर त्रिपाठी
---------------
७. ब्रज में हरी होरी मचाई
ब्रज में हरि होरी मचाई2
होरी मचाई धूम मचाई2
ब्रज में हरी होरी मचाई2
इत से निकसी नवल राधिका,
उत से कुँवर कन्हाई-2
खेलत फाग परस्पर हिलमिल,
खेलत फाग परस्पर हिलमिल,
शोभा बरनी न जाई
घरे घर बाजे बधाई
ब्रज में हरी होरि मचाई-2
होरी मचा----2
ब्रज में---
बाजत ढोल मृदंग झाँझ डफ,
घरे घर बाजे बधाई
ब्रज में हरी होरि मचाई-2
होरी मचा----2
ब्रज में---
बाजत ढोल मृदंग झाँझ डफ,
ओ मुरली शहनाई-2
उड़त गुलाल लाल भए बादर,
उड़त गुलाल लाल भए बादर,
रहत सकल ब्रज छाई
मानौ मेघवा घिर आई
ब्रज मे हरी होरी मचाई-2
होर्रि मचाई---
ब्रज में हरी----
खेलत गेन्द गिरे जमुना में,
मानौ मेघवा घिर आई
ब्रज मे हरी होरी मचाई-2
होर्रि मचाई---
ब्रज में हरी----
खेलत गेन्द गिरे जमुना में,
को मोर गेन्द चुरायी-2
हाथ डारि अँगिया बिच ढुँढे,
हाथ डारि अँगिया बिच ढुँढे,
एक गये दोउ पायी
लाल जी ने चोरी लगाई
ब्रज मे__
राधा संग लिये सखियन सब,
लाल जी ने चोरी लगाई
ब्रज मे__
राधा संग लिये सखियन सब,
झुंड-झुंड उठि धाई-2
लपटि-झपटि के श्याम सुन्दर को,
लपटि-झपटि के श्याम सुन्दर को,
बरबस पकड़ि मंगाई
लाल जी को नारी बनाई
ब्रज में----
छीन लिये मुख मुरली पिताम्बर,
लाल जी को नारी बनाई
ब्रज में----
छीन लिये मुख मुरली पिताम्बर,
सिर पर चुनरी ओढाई-2
बिन्दी भाल नयन बिच काजर,
बिन्दी भाल नयन बिच काजर,
नकबेसर पहिराई
लालजी को नाच नचाई
ब्रज में-----
सुसुकत हैं मुख मोड़ि मोड़ि के,
लालजी को नाच नचाई
ब्रज में-----
सुसुकत हैं मुख मोड़ि मोड़ि के,
कहँवा गये चतुराई-2
कहँवा गये तोरे नन्द बाबा हो,
कहँवा गये तोरे नन्द बाबा हो,
कहँवा जसोदाजी माई
लालजी के लेहु ना छोराई
ब्रज में हरि----
बिन फगुआ तोहे जाने न दूँगी,
लालजी के लेहु ना छोराई
ब्रज में हरि----
बिन फगुआ तोहे जाने न दूँगी,
करिहौं तु कोटी उपाई
लैहों चुकाई कसर सब दिन के,
लैहों चुकाई कसर सब दिन के,
तू बहु चीर चोराई
बहुत दधि माखन खाई
ब्रज में----
--------------
बहुत दधि माखन खाई
ब्रज में----
--------------
८. बरजो ए जसोदा जी
बरजो हे जसोदा जी कान्हा2
जसोदा जी कान्हा 2
बरजो हे जसोदा जी कान्हा2
मैं दधी बेचन जात बृन्दावन,
मारग में हठ कीन्हा2
बरबस पकड़ि मटुक सिर फोड़ै,
बरबस पकड़ि मटुक सिर फोड़ै,
अबिर दिए मुख लोना
सखी सब देत हैं ठोना
बरजो हे जसोदा---2
जसोदाजी ----2
बरजो हे ----2
मेरो लाल पलने पर सोवै,
सखी सब देत हैं ठोना
बरजो हे जसोदा---2
जसोदाजी ----2
बरजो हे ----2
मेरो लाल पलने पर सोवै,
बालक निपट नदाना-2
ऊ का जाने रस की बातें-2,
ऊ का जाने रस की बातें-2,
खाना खेलन अरुझाना
उलटि गये तोहरो ज्ञाना
बरजो हे जसोदा जी----
वाही समय मनमोहन आये,
उलटि गये तोहरो ज्ञाना
बरजो हे जसोदा जी----
वाही समय मनमोहन आये,
आवत हि हठ ठाना-2
ये मैया मोहे बहुत सतावे-2,
ये मैया मोहे बहुत सतावे-2,
मारे नजरिया के बाना
उलट आवे उलहाना
बरजो हे ----
तुम साँचो तुम्हरो सुत साँचो,
उलट आवे उलहाना
बरजो हे ----
तुम साँचो तुम्हरो सुत साँचो,
हम सब करत बहाना-2
सूर श्याम प्रभु तुम्हरे दरस के-2,
सूर श्याम प्रभु तुम्हरे दरस के-2,
ब्रज तज बसिहौं मैं आना
जहाँ हमरौ मनमाना
बरजो हे जसोदाजी---
--------------
जहाँ हमरौ मनमाना
बरजो हे जसोदाजी---
--------------
९. नेह लागो मोर
नेह लागो मेरो श्याम सुन्दर से-2
स्याम सुन्दर से राधा वर से-2
नेह लागो मेरो श्याम सुन्दर से-2
आये बसंत सकल बन फूलै,
फूल खिलै सरसो के-2
मैँ पियरी भई पिया के बिरह में-2,
मैँ पियरी भई पिया के बिरह में-2,
निकसत प्राण अधर से
कहो जाके राधा वर से
नेह लागे मेरो----
फागुन में सब फाग खेलत हैं,
कहो जाके राधा वर से
नेह लागे मेरो----
फागुन में सब फाग खेलत हैं,
अपना अपना वर से
पिया के विरह से जोगिन ह्वैं निकसी-2,
पिया के विरह से जोगिन ह्वैं निकसी-2,
धूरा उड़ावत कर से
चलि मथुरा की डगर से
नेह लागे ----
ऐ उधो तुहूँ जाहुँ द्वारिका,
चलि मथुरा की डगर से
नेह लागे ----
ऐ उधो तुहूँ जाहुँ द्वारिका,
इतना अरज मोर हरि से
बिरह विदग्ध जियरा जरतु हैं-2,
बिरह विदग्ध जियरा जरतु हैं-2,
जब से गये हरी घर से
दरस बिन जियरा तरसे
नेह--------
सूर श्याम प्रभु इतना अरज है,
दरस बिन जियरा तरसे
नेह--------
सूर श्याम प्रभु इतना अरज है,
कृपासिन्धु गिरधर से
गहरी नदिया नाव पुरानी-2,
गहरी नदिया नाव पुरानी-2,
अबकी उबारो भँवर से
अरज मोरी राधा वर से
नेह लागे मोर श्याम सुन्दर से-2
--------------
अरज मोरी राधा वर से
नेह लागे मोर श्याम सुन्दर से-2
--------------
१०. फूल फागुरी
आये बसंत सकल बन फूले,
कोयल बोलत सरस रागुरी
उमगी आनन्द अवध अधिकारी
उमगी आनन्द अवध अधिकारी
भूप द्वार होरी होनु लागुरी
दूऊ खेलत फूल फागुरि-२
दूऊ खेलत फूल फागुरि-२
फूल फागुरी, फूल फागुरी
दोऊ खेलत फूल फागुरी-२
बाजत ताल मृदंग् झाँझ डफ
मध्य सुरन भये मधुर रागुरी
सुनत श्रवण हर विधि उठि धाये,
सुनत श्रवण हर विधि उठि धाये,
नहीं भावत जप जोग जागुरी
दोऊ खेलत फूल फागुरी-२
दोऊ खेलत फूल फागुरी-२
इतसे राम सखा जुर आये,
सिय समाज लिये अमृत गागुरी
मचै कीच बिच मध्य अवध में
मचै कीच बिच मध्य अवध में
मज्जन मुक्तमन मकर प्रयांगुरी
दोऊ खेलत फूल फागुरी
दोऊ खेलत फूल फागुरी
फूल फागुरी----२
भींज गये तन चीर चादुरी,
पटजा माल रुमाल पागुरी
महाराज महारानी के भयऊ,
महाराज महारानी के भयऊ,
भयऊ एक रंग अरुण बागुरी
दोऊ खेलत फूल फागुरी
-----------
दोऊ खेलत फूल फागुरी
-----------
११. रघुवर जी से
रघुबर जी से बैर करो न2
बैर करो न बैर करो2
रघुबरजी से----2
सत योजन परमाण सिन्धु के
सो कोई बान्ध सकै ना
ताही बान्ध उतरै रघुनन्दन-2,
ताही बान्ध उतरै रघुनन्दन-2,
संग भालु कपि सैना
समर कोई जीत सकै ना
रघुबरजी से बैर करो ना
बैर करो ना----2
रघु----
होली से लंका जलाये दियो है,
समर कोई जीत सकै ना
रघुबरजी से बैर करो ना
बैर करो ना----2
रघु----
होली से लंका जलाये दियो है,
भागे से जीव बचै ना
करि करि जतन वीर सब थाकै,
करि करि जतन वीर सब थाकै,
पावक प्रबल बुझै ना
युक्ति कछु एक लहै ना
रघुवरजी----
तुम जीयो अहवात हमारो
युक्ति कछु एक लहै ना
रघुवरजी----
तुम जीयो अहवात हमारो
सत्य कहौं प्रिय बैना
किन्ही रार नहीं फरियैहें,
किन्ही रार नहीं फरियैहें,
ताही संग जाये मिलो ना
भागै तिहूँ लोक बचै ना
रघुबरजी से----2
मय-तनया बहु भाँति सिखायो
भागै तिहूँ लोक बचै ना
रघुबरजी से----2
मय-तनया बहु भाँति सिखायो
निशिचर कान धरै ना
तुलसीदास कहै मूढ भय रावण,
तुलसीदास कहै मूढ भय रावण,
फूटे हिया की नैना
तासो कछु सूझि पड़ै ना
रघुबरजी से----2
---------------
तासो कछु सूझि पड़ै ना
रघुबरजी से----2
---------------
१२. हनुमानजी
लाल लंगोट बनै अति सुन्दर
सेन्दुर तेल लगाये
एक कर गदा दोसर धवलागिरि
एक कर गदा दोसर धवलागिरि
अवध उपर चलि आये
भरत्जी ने बाण चलाये
अंजनी-सुत हरी मन भाये-2
हरि मन भाये, प्रभु मन भाये-2
अंजनी--------2
लागत बाण गिरे धरणि पर
भरत्जी ने बाण चलाये
अंजनी-सुत हरी मन भाये-2
हरि मन भाये, प्रभु मन भाये-2
अंजनी--------2
लागत बाण गिरे धरणि पर
राम राम गोहराये
अचरज भयऊ भरतजी के मन में-2,
अचरज भयऊ भरतजी के मन में-2,
को ऐसो दूत पठाये
जो राम राम गोहराये
अंजनी सुत--------
केकर सुत केकर तुहू नायक
जो राम राम गोहराये
अंजनी सुत--------
केकर सुत केकर तुहू नायक
कौन पुरी से आये
कौन पुरुषवा के करत चाकरी,
कौन पुरुषवा के करत चाकरी,
कौन सन्देशा लेके आये
भरतजी के देहु ना बताये
अंजनी सुत------
अंजनीपुत्र पवनसुत नामा,
भरतजी के देहु ना बताये
अंजनी सुत------
अंजनीपुत्र पवनसुत नामा,
लंकपुरी से आये
रामचन्द्रजी के करत चाकरी-2,
रामचन्द्रजी के करत चाकरी-2,
लक्ष्मण शक्ति सताये
संजीवन आनन आये
अंजनी सुत -----
संजीवन आनन आये
अंजनी सुत -----
------------
13. बारहमासा
फगुआ फाग खेलब पियवा संग
चैत खेलब बरजोरी
पियवा संग खेलब होरी-2
बैसाख में हे सखी गरमी परत हैं
जेठ में लूक परो री
पियवा संग खेलब होरी
खेलब होरी खेलब होरी
पियवा संग खेलब होरी-2
आये असाढ घटा घनघोरी
सावन बूंद परो री
भादव हे सखी रैन भयावन-2
आसिन ओस गिरो री
पियवा संग खेलब होरी-2
खेलब होरी खेलब होरी
पियवा संग खेलब होरी-2
कातिक कंत बिदेस गयो है
अगहन धान कटो री
पूस के दिन फूस सम बीते-2
माघ में पाला परो री
पियवा संग खेलब होरी-2
खेलब होरी खेलब होरी
पियवा -----2
